गुरुवार, 9 जून 2011

खुदा ही कह दूं ..

क्या नज़ारे अब भी उसी के हाथ हैं की कब बदलेंगे...क्या इतने दिनों बाद भी इतनी दूर से ही वही तय करेगा की कब मैं खुश रहूँगा ...तो क्यों न मैं उसे खुदा ही कह दूं ..

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